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" जीतने वाले छोड़ते नहीं और छोड़ने वाले जीतते नही "

Friday, September 19, 2014

ये दिल मशगूल है....

जो रूबरू हुआ
उसने फिर से डोरे डाले मेरे तन्हाई पे,
शुक्रिया इस दिल का जो रूबरू हुआ,
उस रेशमी चिकनाई से,
रस्मे रिवाजो और जुदाई से परे,
ये दिल मशगूल है अपने तन्हाई में।  
                                 :-अमित राय 

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