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" जीतने वाले छोड़ते नहीं और छोड़ने वाले जीतते नही
"
Friday, September 19, 2014
ये दिल मशगूल है....
जो रूबरू हुआ
उसने फिर से डोरे डाले मेरे तन्हाई पे,
शुक्रिया इस दिल का जो रूबरू हुआ,
उस रेशमी चिकनाई से,
रस्मे रिवाजो और जुदाई से परे,
ये दिल मशगूल है अपने तन्हाई में।
:-अमित राय
Thursday, September 18, 2014
नशीली है नयन...
खुली है जुल्फें तुम्हारी,
नशीली है नयन भी।
कही आज,
क़त्ल करने का इरादा तो नही।
:-
अमित राय
Tuesday, September 9, 2014
वादी-ए- इश्क़
वादी-ए- इश्क़ में नाकाम हुये हम,
वफ़ा करने आये थे इन बेवफ़ाओ की दुनिया में,
इन बेवफ़ाओं ने मुझे भी बेवफ़ा बना दिया।
अमित राय
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