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" जीतने वाले छोड़ते नहीं और छोड़ने वाले जीतते नही "

Friday, May 28, 2010

निमंत्रण

निमंत्रण तुम जो नहीं आयी गीत गा नहीं पाउगा, साँस साथ छोड़ेगी , सुर सजा नहीं पाउगा, तो तान भावना की शब्द शब्द दर्पण है, बासुरी चली आयो होढ का निमंत्रण है ! तुम बिना हथेली की हर लकीर प्यासी है , तीर पर कान्हा से दूर राधिका सी है , रत के अंधेरो में यादो संग खेला है , कुछ गलत ना कर बैढे, मन बहुत अकेला है , तो , औषधि चली आयो चोट का निमंत्रण है बासुरी चली आयो होढ का निमंत्रण है !! तुम अलग हुए मुझसे सांसो की खातावो पे, भूक की दलीलों से वक्त के सजाओ से , दुरीओ को मालूम है , दर्द कैसे सहना है , आँख लाख चाहे पर होढ से कुछ ना कहना है , तो कंचनी कसौटी को खोट का निमंत्रण है , औषधि चली आयो चोट का निमंत्रण है बासुरी चली आयो होढ का निमंत्रण है !!

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